Wednesday, March 24, 2010

हिंदी अनुवादकों के पैनल का गठन _26 मार्च को 11.00 बजे ग्रीन पार्क एक्स, में बैठक का आयोजन

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने 2001 की जनगणना के आधार पर माना है कि 551.4 मिलियनलोग भारत में हिंदी बोलते हैं. मैं इन आँकड़ों की प्रामाणिकता के बारेमें चर्चा नहीं करना चाहता, लेकिन इस विडंबना की ओर आप सबका ध्यान आकृष्टकरना चाहता हूँ कि इतने बड़े जनबल के बावजूद हिंदी में तकनीकी विषयों परपढ़ने-लिखने वालों की संख्या बिल्कुल नगण्य है. कदाचित् यही कारण है किहिंदी में गंभीर विषयों पर विशेषकर तकनीकी और सूचना प्रौद्योगिकी जैसेविषयों पर नेट पर बहुत कम सामग्री उपलब्ध है. यद्यपि माइक्रोसॉफ़्ट और सीडैक जैसी कंपनियों ने इस दिशा में जबर्दस्त पहल की है, लेकिन उनकी अपनीवेबसाइट भी अब तक हिंदी में विकसित नहीं की जा सकी है.
कुछ दिन पूर्व रेडमंड (माइक्रोसॉफ्ट का अमरीका में स्थित मुख्यालय) मेंएक बैठक के दौरान माइक्रोसॉफ्ट के आकाओं से यह प्रश्न पूछा गया किमाइक्रोसॉफ्ट ने विश्व की अधिकांश भाषाओं में अपनी वेबसाइट बनाई है,लेकिनहिंदी में क्यों नहीं बनाई, जबकि विश्व भर में हिंदी बोलने और समझनेवालों की संख्या चीनी और अंग्रेज़ी के बाद तीसरे स्थान पर है. कुछ लोग तोइसका स्थान दूसरा भी मानते हैं. इस पर उत्तर मिला कि हिंदी में इन विषयोंको पढ़ने वाले लोगों की तादाद न के बराबर है.
इस घटना से व्यथित होकर माइक्रोसॉफ़्ट के ही एक वरिष्ठ अधिकारी अभिषेककांत ने निजी तौर पर इस चुनौती को स्वीकार किया और यह संकल्प किया किअगले तीन महीने में वे हिंदी प्रेमियों के सहयोग से निम्नलिखित वेबसाइटको हिंदी में भी बना देंगे और तब यह देखेंगे कि इसे कितने हिंदी भाषीदेखते हैं. http://support.microsoft.com/?ln=hi-inफिलहाल इस वेबसाइट का मात्र इंटरफ़ेस ही हिंदी में है.
अपने इस अनुष्ठान को सार्थक बनाने के लिए उन्होंने एक छोटी-सी पहल करनेका संकल्प किया है और हिंदी-अनुवाद के महारथी श्री चंद्रमोहन ऱावल कीअध्यक्षता में हिंदी अनुवादकों का एक पैनल गठित किया. यह पैनल तीन महीनेकी अवधि में लगभग 100 से 200 पृष्ठों को हिंदी में अनूदित करेगा. यहकार्य पूरी तरह से स्वैच्छिक और निःशुल्क होगा,लेकिन इस कार्य के संपन्नहोने के बाद प्रत्येक सहभागी को माइक्रोसॉफ़्ट की ओर से एक प्रमाणपत्रदिया जाएगा.
इस संबंध में निम्नलिखित विशेषज्ञ सहयोग प्रदान करेंगेः
1. शब्दावली और वर्तनी की एकरूपता के बारे में विजय कुमार मल्होत्रा, पूर्व निदेशक (राजभाषा),रेल मंत्रालय, भारत सरकार malhotravk@gmail.com मोबाइल 91-9910029919
2. अनुवाद के बारे में श्री चंद्रमोहन रावल, पूर्व सहायक प्रबंधक (हिंदी), रिजर्व बैंक औरभारतीय अनुवादक संघ (ITA India) के उपाध्यक्ष और प्रोज़ डॉट कॉम(ProZ.com) के सदस्य cmrawal@yahoo.com मोबाइल 09818450779
3. तकनीकी मार्गदर्शन के बारे में अभिषेक कांत, Community Program Manager, Microsoft Corp (India)Pvt. Ltd.,गुड़गाँवabhishek.Kant@microsoft.com मोबाइलः 09899115376
इन विषयों पर विचार करने के लिए नई दिल्ली में एक बैठक बुलाई गई है. जोहिंदी प्रेमी और विशेषज्ञ इस बैठक में भाग लेना चाहें ,वे कृपया अपनीसहभागिता के बारे में उक्त में से किसी को भी सूचना भेज दें ताकि आवश्यकव्यवस्था का जा सके.
सम्यक् प्रतिष्ठान
के 13 बेसमेंट
ग्रीनपार्क एक्सटेंशन,
नई दिल्ली

save environment

Monday, March 15, 2010

खेलेगा हर कोई जीतेगी दिल्ली - विषय पर खालसा कालेज में संगोष्ठी आयोजित



दिल्ली विश्वविधालय के श्री गुरू तेगबहादुर खालसा कालेज के ‘‘स्पोर्टस इकानामिक्स एण्ड मार्केटिंग’’ और ‘‘वेब पत्रकारिता’’ के विद्यार्थियों द्वारा एक दिवसीय खेल उत्सव ‘‘जोश’’ का आयोजन किया गया। इस उत्सव में अनेक खेल प्रतियोगिताओं के साथ-साथ राष्ट्रमंडल खेल से संबंधित विषय ‘‘खेलेगा हर कोई, जीतेगी दिल्ली’’ विषय पर संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं सीएनईबी चैनल के सी.ई.ओ. श्री राहुल देव थे। उन्होंने देश के विकास में खेलों की उपयोगिता पर बात करते हुए कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि जिस कोर्स को खालसा कालेज ने शुरू किया है उसे ज्यादा से ज्यादा कालेजों द्वारा अनुसरण किया जाए। साथ ही यह भी जरूरी है कि जो आधारभूत ढांचा राष्ट्रमंडल खेलों के लिए तैयार किया जा रहा है उसका बेहतर उपयोग इन खेलों के बाद भी होता रहे तभी देश के विकास में इसकी सार्थक भूमिका होगी। वह अस्थायी विकास का साधन बनकर न रह जाए। अन्य वक्ताओं में ईएसपीएन के सौमित्र बोस ने नए पाठ्यक्रम शुरू करने पर खालसा कालेज को बधाई देते हुए कहा कि आज खेलों पर आधारित पाठयक्रम की अत्यंत आवश्यकता है। यह बड़ी खुशी की बात है कि खालसा कालेज देश का ऐसा पहला कालेज है जिसने खेल और बाजार के संबंधों को पहचाना। राष्ट्रमंडल के सलाहकार समिति के सदस्य अविनाश सिंह ने खेल और विकास के आपसी संबंधों पर चर्चा करते हुए कहा कि खेल के एक आयोजन से किसी भी शहर, देश के आर्थिक परिदृश्य में बहुत बदलाव आता है। जिस तरह से आइ.पीएल के आगमन से खेलों का आर्थिक परिदृश्य बहुत उपर चला गया है। पैट्रोलियम मंत्रालय के अखिलेश झा ने खेल के वित्तीय पक्ष को उजागर करते हुए कहा कि खेलों में वित्तीय आडिट के साथ सामाजिक आडिट होना भी बहुत जरूरी है, तभी खेल अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। कोर्स डेवलपर एवम स्पोर्टस एंकर अर्जुन जे. चौधरी ने कालेज प्रधानाचार्य डा. जसविंदर सिंह की सार्थक भूमिका को सराहते हुए कहा कि नए विचार को पाजिटिव रुख अपनाना ही आधी सफलता हो जाती है। कोर्स के सफल होने के पीछे प्रशासन की सकारात्मक सोच बहुत जरूरी है। उन्होंने खेल और मीडिया के आपसी मजबूत संबंधों पर भी प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि खेल के विकास में विज्ञापन की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है और खेलों में पैसा तभी आता है। धन्यवाद ज्ञापन पाठयक्रम समन्वयक डा. स्मिता मिश्र ने करते हुए कहा कि आज शिक्षा को परम्परागत विषयों से आगे बढ़ाने की जरूरत है। प्रतियोगिताओं में जंकयार्ड वार्स,स्पोर्ट्स क्विज, स्पोर्टस पायट्री, बास्केटबाल, क्लिक ए पिक, आर्म रेसलिंग जैसे रोचक इवेंट आयोजित किए जिसमें भारी संख्या में विद्यार्थियों ने ‘‘जोश’’ में बढ़चढ़ कर भाग लिया।

Wednesday, February 24, 2010

देश के शीर्ष दस अखबारों में हिन्दी के 5, अंग्रेजी का एक भी नहीं _ मी़डिया विस्फोट के सौजन्य से


देश के शीर्ष दस अखबारों के पहले, दूसरे, तीसरे और चौथे नंबर पर हिन्दी के अखबार हैं. इंडियन रीडरशिप सर्वे के अनुसार देश के दस बड़े अखबारोंमें पांच हिन्दी भाषा के अखबार हैं जिसमें दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर,अमर उजाला, हिन्दुस्तान और राजस्थान पत्रिका शामिल है. हालांकि आईआरएस केआंकड़े बताते हैं कि हिन्दुस्तान और राजस्थान पत्रिका को छोड़कर शीर्ष केसभी अखबारों के पाठकों की संख्या में कमी आयी है. आश्चर्यजनक रूप से देशके शीर्ष दस अखबारों में अंग्रेजी का एक भी अखबार अभी भी अपनी जगह नहींबना पाया है. इंडियन रीडरशिप सर्वे के पहले दौर के सर्वे का डाटा रिलीज हो गया है.पहले दौर के सर्वे के बाद जो आंकड़े निकलकर सामने आये हैं उसमें दैनिकजागरण लगातार पहले स्थान पर बना हुआ है. हिन्दी के अखबार दैनिक जागरण कीकुल पाठक संख्या 5.45 करोड़ बतायी गयी है. हालांकि पिछले साल आईआरएस(इंडियन रीडरशिप सर्वे) के मुकाबले दैनिक जागरण के पाठकों की संख्या में21 लाख की गिरावट आयी है फिर भी वह देश का नंबर अखबार बना हुआ है. दूसरे नंबर है दैनिक भास्कर. दैनिक भास्कर की पाठक संख्या में भी 2.8 लाखकी गिरावट दर्ज हुई है लेकिन 3.19 करोड़ पाठकों के साथ वह देश का दूसरासबसे बड़ा अखबार बना हुआ है. दैनिक भास्कर डीबी कार्प का उद्यम है. तीसरे नंबर पर भी हिन्दी का एक और अखबार है - अमर उजाला. आईआरएस के पहलेराउण्ड के आंकड़े बताते हैं कि अमर उजाला के पाठकों की संख्या में भी 7लाख की कमी आयी है. आईआरएस के पहले राउण्ड में अमर उजाला के पाठकों कीसंख्या 2.87 करोड़ बतायी गयी है.जबकि इसी कालावधि में पिछले साल जारीआंकड़ों के हिसाब से अमर उजाला के पास 2.94 करोड़ पाठक थे. इंडियन रीडरशिप सर्वे-2009चौथे नंबर पर भी हिन्दी का ही एक और अखबार दैनिक हिन्दुस्तान है.हिन्दुस्तान हिन्दुस्तान टाइम्स समूह का अखबार है. हिन्दुस्तान हिन्दी काअकेला ऐसा अखबार है जिसके पाठकों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी जारीहै. आईआरएस - 2009 के पहले दौर में जब सभी अखबारों के पाठकों की संख्यामें कमी आ रही है तब भी हिन्दुस्तान ने बढ़त जारी रखी है. आईआरएस केआंकड़े बताते हैं कि ताजा दौर के सर्वे में हिन्दुस्तान के पाठकों कीसंख्या में 1.36 लाख की बढ़ोत्तरी हुई है और उसकी कुल पाठक संख्या 2.67करोड़ पहुंच गयी है. पांचवे नंबर पर आश्चर्यनजक रूप से एक मराठी दैनिक ने अपना दावा ठोंक दियाहै. डेली थंती को छठे नंबर पर धकेलते हुए पांचवें स्थान पर मराठी दैनिकलोकमत काबिज हो गया है. लोकमत के पाठकों की संख्या में 7.19 लाख कीबढ़ोत्तरी हुई है और उसके कुल पाठकों की संख्या 2.06 करोड़ पहुंच गयी है.मराठी दैनिक लोकमत पहले भी पांचवें स्थान पर रह चुका है. •देश के लगभग सभी बड़े अखबार के पाठकों की संख्या में गिरावट दर्ज हो रही है•अंग्रेजी का सबसे बड़ा अखबार देश के शीर्ष दस अखबारों में शामिल नहीं है•हिन्दुस्तान टाइम्स समूह का अखबार हिन्दुस्तान अकेला अखबार जिसके पाठकोंकी संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है•राजस्थान पत्रिका के पाठकों की संख्या में भी आंशिक बढ़ोत्तरी•तमिल दैनिक डेली थंथी को लगातार दूसरी बार नुकसानजबकि पांचवें नंबर से खिसकर छठे नंबर पर पहुंचे तमिल अखबार डेली थंथी केपाठकों की संख्या 2.04 करोड़ पर पहुंच गयी है. उसके पाठकों की संख्या में1.19 करोड़ की कमी आयी है. पिछले लगातार तीन दौर के सर्वे में डेली थंथीको पाठकों की संख्या का नुकसान उठाना पड़ा है. और उसके पाठकों की संख्या2.08 करोड़ से गिरकर 2.04 करोड़ पर आ गयी है. सातवें नंबर भी एक तमिल दैनिक दिनकरन है. दिनकरण के पाठकों की संख्या मेंभी 1.92 करोड़ का नुकसान हुआ है और उसके कुल पाठकों की संख्या ताजा सर्वेके अनुसार 1.7 करोड़ से घटकर 1.68 करोड़ हो गयी है. आठवें स्थान पर पश्चिम बंगाल का बांग्ला दैनिक आनंद बाजार पत्रिका है.आनंद बाजार पत्रिका के पाठकों की संख्या 1.55 करोड़ है. ताजा दौर केसर्वे बताते हैं कि आनंद बाजार पत्रिका को भी 1.76 लाख पाठकों का नुकसानहुआ है. नौंवें स्थान पर हिन्दी अखबार राजस्थान पत्रिका है. राजस्थान पत्रिका केकुल 1.4 करोड़ पाठक हैं. अन्य अखबारों की तुलना में राजस्थान पत्रिका केपाठकों की संख्या में 52,000 की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है, जबकि इसके पहलेके दौर के सर्वे में राजस्थान पत्रिका को 3.42 लाख पाठकों का नुकसान हुआथा. पिछले दौर के आईआरएस सर्वे में राजस्थान पत्रिका ईनाडु से पीछे था.इस दौर के सर्वे में वह ईनाडु को पीछे धकेल नौवें नंबर पर आ गया है. तमिल दैनिक इनाडु दसवें नंबर पर है. ईनाडु के पाठकों की संख्या 1.39करोड़ है. उसे 4.2 लाख पाठकों का नुकसान हुआ है. यह दूसरा दौर है जबलगातार ईनाडु के पाठकों में कमी आ रही है. पिछले दो दौर के सर्वे मेंईनाडु को लगभग 7 लाख पाठकों का नुकसान हुआ है. अंग्रेजी के शीर्ष दसभारत के शीर्ष दस अखबारों में अंग्रेजी का एक भी अखबार शामिल नहीं है.अंग्रेजी के सबसे बड़े अखबार टाइम्स आफ इंडिया के पाठकों की संख्या 1.33करोड़ है, जबकि दूसरे नंबर के अंग्रेजी के सबसे बड़े अखबार हिन्दुस्तानटाइम्स के पाठकों की संख्या 63.4 लाख है. हिन्दू तीसरे नंबर पर है औरउसके पाठकों की संख्या 53.73 लाख है. 28.18 लाख पाठकों के साथ दटेलीग्राफ चौथे नंबर पर है. 27.68 लाख पाठकों के साथ डेक्कन क्रानिकलपांचवे नंबर पर है. छठे नंबर पर टाइम्स समूह के व्यावसायिक अखबार दइकोनामिक टाइम्स को जगह मिली है. उसके कुल पाठकों की संख्या 19.17 लाखहै. मुंबई से निकलनेवाला टैबलाइड मिड डे सातवें नंबर पर है. मिड-डे केपाठकों की संख्या 15.83 लाख है. आठवें नंबर पर द न्यू इंडियन एक्सप्रेसहै जिसके पाठकों की संख्या 15.66 लाख है. मुंबई मिरर के पाठकों की संख्या15.57 लाख है और वह नौवें नंबर पर है जबकि दसवें नंबर पर डीएनए है औरउसके पाठकों की कुल संख्या 14.89 लाख है.
विजय कुमार मल्होत्रापूर्व निदेशक राजभाषा

Sunday, February 7, 2010

कविता जी विद्यार्थियों के साथ

(दाये से बाये )डॉ जसबीर कौर डॉ सुमिता लोहिया डॉ रामप्रकाश द्विवेदी ,कविता वाचकनवी,अविनाश जी ,स्मिता मिश्र ।
पीछे विद्यार्थियों की श्रंखला

कविता वाचकनवी जी खालसा कॉलेज में

कविता वाचकनवी जी खालसा कॉलेज में विद्यार्थियों से रूबरू होते हुए . ब्लॉगिंग विधा की विशेषज्ञ कविता जी ने साइबर की अनोखी दुनिया से उन्हें परिचित कराया